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सत्य को जानने से पहले ज़रूरी है कि सत्य क्या है? पहले ये समझा जाये. न्यूज़ की नेगटिविटी में कन्फ़्यूज़्ड और उलझे इस दिमाग़ को पहले सत्य की पहचान करायी जाये. क्योंकि सत्य अच्छाई और बुराई से परे है. अपने पड़ोसी को ठीक से नहीं जानने वाले हम गांधी पर और अपने बच्चों पर अपनी उम्मीदों का बोझा लाद देने वाले हम, भगत सिंह पर सवाल उठा देते हैं.

अपने स्मार्ट फ़ोन और डम्ब दिमाग़ के सहारे हम लोकतंत्र को देखते हैं और आठवीं फ़ेल एजुकेशन के सहारे ईमानदार IAS officer को ट्रोल करते हैं. अंधविश्वास की आरी से काटे गये हमारी बुद्धि से हम एक दूसरे को परखते हैं. और सिर्फ़ इसलिए की भगवान का दिया एक मुँह है, और उसमें बिना हड्डी की ज़बान है. और बस हम कुछ भी बोलते हैं.

सब अगर आस-पास इतना बुरा ही होता, अगर हमारा इतिहास और हमें बनाने वालों का ज़हन इतना अधूरा ही होता तो भाई साब और बहन जी, कोई भी सपना हमारा कभी भी पूरा नहीं होता, तो हमारे देश का एक धाँसू इतिहास है, धाँसू इतिहास में धाँसू characters हैं, धाँसू characters की धाँसू कहानियाँ हैं.

धाँसू… जी, ये हमारा नाम भी है और काम भी, लक्ष्य भी है और पहचान भी. और आये भी आप लोगों के बीच से ही हैं हम, सो ज़रा “डाउन दी मेमरी लेन” जाइएगा और अपने दाएँ-बायें से आयी उन आवाज़ों की तरफ़ ध्यान दीजिएगा, जिसने आपका ध्यान अनायास ही अपनी तरफ़ खींच लिया था, जिनकी कमाल की बातों को सुनने के लिए एक एक्स्ट्रा चाय सुड़क ली थी आपने. जी वही हैं हम.

 

नहीं नहीं, पत्रकार? जी नहीं… अरे सुनिये ना, पत्रकार इसलिए नहीं हैं हम, क्योंकि चिल्लाने वाला गला ऊपर वाले ने दिया नहीं है, और त्योरियाँ चढ़ाकर दुनिया से चिढ़ा हुआ इक्स्प्रेशन हमें सूट नहीं करता है और ना ही अपने को प्रेशर देने के लिए कोई ऊपरवाला है. पर ख़बर तो है गुरु अपने पास. तो ठीक वैसे ही, जैसे दादी को घर से बाहर निकले बग़ैर पूरे मुहल्ले की धाँसू ख़बरें मिल जाती थी, ठीक वैसे ही हम ले आएँगे आप के पास सारी की सारी धाँसू ख़बरें, सच्ची भी और अच्छी भी.

पत्रकार नहीं, कलाकार लोग हैं हम गुरु… ख़बर जानते भी हैं और समझते भी हैं. बताने का सलीक़ा भी जानते हैं और जताने का तरीक़ा भी. कानों ने हमारी सुनना नहीं छोड़ा है और नज़र ने परखना नहीं छोड़ा है. इसलिए तहज़ीब के ट्रैक पर रखा है. हमने सच का रेल और गुरु इमोशन का ही तो है सारा खेल. समझ गए ना? सही, तो ख़बर-वबर से भी ज़्यादा ज़रूरी धाँसू बातें हैं अपने पास.

राजनीति का राज, सिनेमा की माँ, खेल की खेंखें और साहित्य का इतिहास, सब कुछ है अपने पास. और वो भी धाँसू. क्या कहा? वेबसाइट पर जाना है? अरे चलिए भाई… नेकी और पूछपूछ… और बताइये, क्या सब चल रहा है.

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