Contact Information

Theodore Lowe, Ap #867-859
Sit Rd, Azusa New York

We Are Available 24/ 7. Call Now.

कोरोना के बढ़ते प्रकोप के बीच भारत में एक अच्छी खबर सामने आई है। अब केरल के बाद दिल्ली भी प्लाज्मा थेरेपी के माध्यम से कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों का इलाज संभव हुआ है।

फिलहाल, प्लाज़्मा थेरेपी के अलावा इलाज़ का कोई विकल्प न होने के कारन इसे मंजूरी मिल गई है। शुरुआत में इस थेरेपी से ट्रायल के तौर पर बेहद गंभीर मरीजों का इलाज होगा। गौरतलब है कि, केंद्र सरकार के प्रोटोकाल के आधार पर दिल्ली सरकार इस तकनीक पर काम करेगी। इसके लिए सभी जरूरी मंजूरियां मिल गई हैं।

plazma therapy

दिल्ली के एक प्राइवेट अस्पताल ने कोविड-19 के मरीज़ों का ‘प्लाज़्मा थेरेपी’ से इलाज किया है. उनका दावा है कि इस इलाज से लोगों के स्वास्थ्य में सुधार देखने को मिल रहा है.

भारत में कोविड-19 के इलाज के लिए प्लाज़्मा थेरेपी को सीमित तौर पर ट्रायल की सशर्त इजाजत भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद और ड्रग्स कंट्रोलर-जनरल ऑफ़ इंडिया को देना है.

फ़िलहाल, ये इजाज़त मैक्स अस्पताल को नहीं मिली है. लेकिन कम्पैशनेट ग्राउंड, यानी अनुकंपा के आधार पर मैक्स ने एक मरीज़ पर ये ट्रायल किया है और नतीज़े सकारात्मक आए हैं.

मैक्स अस्पताल का दावा है कि कोविड19 का ये मरीज़ अब वेंटिलेटर पर नहीं है. 14 अप्रैल को उनका प्लाज़्मा थेरेपी से इलाज शुरू किया गया था. दिल्ली के इस मरीज़ की उम्र 49 साल है. इन्हें 4 अप्रैल को अस्पताल में बुख़ार और सांस लेने की दिक्कत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

इनकी तबीयत धीरे-धीरे और बिगड़ती चली गई, फिर इन्हें ऑक्सीजन पर रखने की नौबत आ गई. उन्हें निमोनिया हो गया और 8 अप्रैल आते-आते मरीज़ को वेंटिलेटर सपोर्ट की ज़रूरत पड़ी. इसके बाद परिवार ने डॉक्टरों से प्लाज़्मा थेरेपी के ज़रिए इलाज करने की गुज़ारिश की.

परिवार ने प्लाज़्मा के लिए डोनर भी ख़ुद ही ढूंढा और 14 अप्रैल को नए तरीक़े के साथ इलाज शुरू किया गया. मरीज़ 18 अप्रैल से वेंटिलेटर सपोर्ट पर नहीं हैं और फ़िलहाल, स्वस्थ बताए जा रहे हैं. हालांकि डॉक्टरों ने उन्हें अपनी निगरानी में अस्पताल में ही रखा है.

यही है बड़ी अड़चन

भारत सरकार के ताज़ा आँकड़ों के मुताबिक़, देश भर में तकरीबन तीन हजार से ज़्यादा लोग कोविड-19 के इलाज के बाद ठीक हो चुके हैं. इनमें से जितने लोग 3 हफ्ते पहले ठीक हुए हैं वो डोनर बन सकते हैं. लेकिन इसके लिए वो सामने नहीं आ रहे.

और यही है इस इलाज़ में सबसे बड़ी अड़चन.

क्या है प्लाज्मा तकनीक?

एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया का कहना है कि “प्लाज्मा तकनीक में संक्रमण से मुक्त हो चुके मरीजों के रक्त की आवश्यकता पड़ती है। इसलिए जो लोग कोरोना वायरस से ठीक हो चुके हैं अगर वह लोग रक्तदान करेंगे तो ही प्लाज्मा तकनीक पर ट्रायल शुरू हो सकता है।”

plazma therapy

कोरोना वायरस से संक्रमित जो लोग ठीक हो रहे हैं, उनके शरीर के प्लाज़्मा में कोरोनावायरस के खिलाफ़ एंटीबॉडी बन रही है। वहीं ठीक हुए व्यक्ति के शरीर में संक्रमण बिलकुल नहीं है। थ्योरी है कि जो संक्रमण से बरी हो चुके हैं, वे प्लाज़्मा डोनेट कर सकते हैं। इन स्वस्थ हो चुके लोगों के प्लाज़्मा में कोरोनावायरस के खिलाफ़ बनी एंटीबॉडी मौजूद होंगी.

अब इस प्लाज़्मा को कोरोनावायरस से संक्रमित व्यक्ति को ट्रान्स्फ़र किया जाएगा. ट्रान्स्फ़र के बाद ये प्लाज़्मा उनके शरीर में वायरस से लड़ेगा और उन्हें रोगमुक्त करेगा. इस टेकनीक को passive immunisation कहते हैं .

Share:

administrator