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योग और राजनीति का ताल्लुक बहुत पुराना है. आज जब मंच पर खड़े होकर कोई योगगुरु अपने अंदर की छुपी हुई महत्वाकांक्षा को ज़ाहिर करते हुए किसी नेता का समर्थन करता है. तब मालूम होता है कि सियासत में भी ‘अनुलोम-विलोम’ को तरजीह दी जा सकती है. पर ये सच नहीं है. ऐसा कहना झूठ भी नहीं है.

लेकिन आज हम उस योगगुरु के बारे में बात करने जा रहे हैं, जिन्होंने चुनावी मंच का इस्तेमाल न करते हुए भी मैडम गांधी तक पहुंच रखते थे.

नाम था धीरेन्द्र ब्रह्मचारी.

साउथ दिल्ली का पॉश एरिया फ्रेंड्स कॉलोनी. एक से बढ़कर एक कोठियां और उन सबके आगे कई लग्‍जरी कारें खड़ी हैं. यहां की ए-50 नंबर की कोठी में एक जमाने में शक्तिशाली नेताओं, अभिनेताओं, बड़े उद्योगपतियों का दिनभर आना-जाना लगा रहता था.

ये सब योग गुरु धीरेंद्र ब्रह्मचारी से चंदेक मिनट मिलकर ही खुद को ख़ुशनसीब महसूस किया करते थे. धीरेंद्र ब्रह्मचारी फ्रेंड्स कॉलोनी में ही रहते थे, तब उनके पूरे जलवे थे. उनकी पहुंच प्रधानमंत्री आवास 1 सफदरजंग रोड तक थी. वह प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के योगगुरु थे. वह लगभग रोज ही इंदिरा गांधी को योग करवाने जाते थे. उनके शिष्य बाल मुकुंद भी 1 सफदरजंग रोड जाते थे.

धीरेन्द्र ब्रह्मचारी

धीरेंद्र ब्रह्मचारी 1978 से 1983 के दरम्यान दूरदर्शन पर योग की पाठशाला भी चलाते थे. उसमें वह अपने शिष्य बाल मुकुंद से विभिन्न योग क्रियाएं करने के लिए कहा करते थे.

आजकल महिपालपुर में राजनीतिक और टेलीविज़न की चकाचौंध से दूर जीवन गुजार रहे बाल मुकुंद ही धीरेंद्र ब्रह्मचारी के साथ आर.के. धवन, बूटा सिंह, यशपाल कपूर वगैरह की क्लास लिया करते थे.

धीरेंद्र ब्रह्मचारी ने अपने तमाम शिष्यों में बाल मुकुंद को दूरदर्शन पर योग पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रम के लिए चुना.

30 अक्टूबर, 1984 को हुई इंदिरा गांधी की हत्या से धीरेंद्र ब्रह्मचारी टूट गए. उनकी देखरेख में ही इंदिरा गांधी की अंत्येष्टि हुई. लेकिन इसके साथ ही उनके सितारे गर्दिश में आने लगे. दूरदर्शन पर उनका कार्यक्रम बंद हो गया. उस कार्यक्रम ने उन्हें अखिल भारतीय स्तर पर पहचान दिलवाई थी.

यह बात बहुत कम लोगों को ही मालूम है कि बिहार के मधुबनी जिले से संबंध रखने वाले धीरेंद्र ब्रह्मचारी नेहरूजी के दौर में ही दिल्ली आ गए थे. वह पहले तीन मूर्ति भवन में इंदिरा गांधी को योग की बारीकियां समझाते थे. बाद के दौर में वह इंदिरा गांधी के सलाहकार की भूमिका में आ गए थे.

धीरेन्द्र ब्रह्मचारी

इंदिरा गांधी की मृत्यु के बाद उनके पास समय ही समय था. अब इस बेदिल दिल्ली ने उनसे दूरियां बना ली थीं. उनसे उनके गिने-चुने मित्र ही मिला करते थे. धीरेंद्र ब्रह्मचारी मीडिया से भी खफा रहते थे. क्योंकि वह उनको लेकर तमाम नेगेटिव खबरें छापता था. पर वह कुछ खेल पत्रकारों को अपने घर में बुलाकर कहने लगे थे कि योग को देश में खेल का दर्जा मिले तो बात बने.

सन 1990 में धीरेंद्र ब्रह्मचारी की एक हादसे में मौत हो गई और उसके साथ ही उनके फ्रेंड्स कॉलोनी वाले घर के दरवाजे उनके बाकी मित्रों के अलावा बाल मुकुंद के लिए भी हमेशा-हमेशा के लिए बंद हो गए. धीरेंद्र ब्रह्मचारी के बाद भी देश में योगगुरु आते रहे. लेकिन राजनीतिक दायरे में उनके कद की बराबरी कोई नहीं कर सका है.

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