Contact Information

Theodore Lowe, Ap #867-859
Sit Rd, Azusa New York

We Are Available 24/ 7. Call Now.

बात सन 1971 की है. जब पूर्वी पाकिस्तान जोकि अब बांग्लादेश है. वहां आर्मी के जुल्म लगातार बढ़ते जा रहे थे, महिलाओं-अल्पसंख्यकों पर बर्बरता जारी थी, अलग बांग्लादेश राष्ट्र की मांग तेज हो रही थी, भारतीय सीमा की ओर भाग कर आ रहे शरणार्थियों की तादाद बढ़ती जा रही थी. उसी बीच जुलाई में अमेरिका के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर हेनरी किसिंजर पाकिस्तान होते हुए भारत की यात्रा पर आए. तब अमेरिका खुले तौर पर पाकिस्तान के साथ था.

मुलाकात के दौरान इंदिरा गांधी ने किसिंजर से बांग्लादेश के लोगों पर पाकिस्तानी आर्मी के जुल्म का जिक्र किया. लेकिन, अमेरिका ने पाकिस्तान के गुनाहों पर जैसे आंखें मूंद रखी हो, आरोपों को मानने से ही इनकार कर दिया.

इसके ठीक 4 महीने बाद भारत और पाकिस्तान दोनों पड़ोसी देश युद्ध के मैदान में आमने-सामने खड़े थे. 3 दिसंबर 1971 को जब पाकिस्तानी एयरफोर्स ने भारत पर हमलों की शुरुआत की तो भारत ने भी पलटवार शुरू कर दिया. लेकिन उस समय पाकिस्तान के कूटनीतिक दोस्त अमेरिका ने भारत पर ही दबाव बनाना शुरू कर दिया. ये इंदिरा गांधी के लिए परीक्षा की घड़ी थी.

पाकिस्तान के खिलाफ भारत की जवाबी कार्रवाई को अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने अमेरिका का अपमान माना और पाकिस्तान की मदद के लिए अमेरिकी जहाजी बेड़ा तक भेज दिया. हालांकि, अमेरिकी दबाव के बावजूद तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पाकिस्तान पर एक्शन के अपने फैसले पर अटल रहीं और भारत के अभिन्न मित्र रूस के आक्रामक रवैये ने अमेरिका का ये दांव भी फेल कर दिया था….

आगे की पूरी कहानी वीडियो में…

Share:

administrator