Contact Information

Theodore Lowe, Ap #867-859
Sit Rd, Azusa New York

We Are Available 24/ 7. Call Now.

भारत की जीडीपी पर चर्चा आम हो चली है. हर तरफ से बस एक ही सवाल है कि आखिर गिरती जीडीपी से आम आदमी पर कितना प्रभाव पड़ने वाला है. तो आज की खबर बस इसी मुद्दे पर.

modi

दरअसल, जीडीपी किसी भी देश की आर्थिक सेहत को मापने का सबसे जरूरी पैमाना होता है. भारत में GDP की गणना हर तीसरे महीने यानी तिमाही आधार पर होती है. बीते सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से जून के दौरान चालू वित्त वर्ष की तिमाही में देश का सकल घरेलू उत्पाद यानी GDP वृद्धि दर शून्य से 23.9 प्रतिशत नीचे लुढ़क गया है, जिसका सीधा असर देश के आम आदमी पर पड़ने वाला है.

बता दें जीडीपी की गिरावट की वजह कोरोना महामारी के बाद लगाया गया लॉकडाउन है. GDP के लिए मुख्य तौर पर 8 औद्योगिक क्षेत्रों कृषि, खनन, मैन्युफैक्चरिंग, बिजली, कंस्ट्रक्शन, व्यापार, रक्षा और अन्य सेवाएं के आंकड़े जुटाए जाते हैं. जुलाई माह में 8 क्षेत्रों में 9.6 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है. GDP के गिरने का आम आदमी पर क्या प्रभाव होगा, आइये इत्मिनान से जानते हैं.

पहला- सकल घरेलू उत्पाद गिरने से प्रति व्यक्ति की औसत आमदनी कम हो जाएगी. अप्रैल से जून के बीच पूरी तरह से देश में लॉकडाउन था. आने वाले समय में गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले लोगों की संख्या बढ़ सकती है. जीडीपी में गिरावट से रोजगार दर में भी कमी आएगी.

दूसरा- रोजगार के क्षेत्र में भी इसका असर देखने को मिल सकता है. ऑटो मोबाइल सेक्टर में तो इसका असर साफ दिखाई दे रहा है. इस क्षेत्र में लाखों लोगों की नौकरियां दांव पर लग गई हैं. अगर अर्थव्यवस्था मंदी में जा रही हो तो बेरोज़गारी का खतरा बढ़ जाता है. नई नौकरियां मिलनी भी कम हो जाती हैं और लोगों को निकाले जाने का सिलसिला भी तेज होता है.

modi

तीसरा- लॉकडाउन की वजह से मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर के हालात काफी बदतर हो चुके हैं. आने वाले समय में इस क्षेत्र में परेशानियां और बढ़ सकती हैं. मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 39.3 प्रतिशत की गिरावट दिखी 2. लॉकडाउन की वजह से मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर के हालात काफी बदतर हो चुके हैं. आने वाले समय में इस क्षेत्र में परेशानियां और बढ़ सकती हैं. मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 39.3 प्रतिशत की गिरावट दिखी है तो कंस्ट्रक्शन सेक्टर की ग्रोथ रेट में 50.2 प्रतिशत की गिरावट आई है.

चौथा- नौकरियों में कटौती, बढ़ती महंगाई और देश की आर्थिक वृद्धि दर में कमी इन तीनों मोर्चों पर निराशा मिलने से लोगों की आर्थिक स्थिति पर इसका सीधा असर देखने को मिलेगा.

पांचवा- लॉकडाउन की वजह से व्यापार, होटल, परिवहन लंबे समय तक बंद रहे हैं. इन तीनों क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों पर जीडीपी गिरने का असर हो सकता है. और सैकड़ों नौकरियों पर तलवार लटक सकती हैं.

Share:

administrator