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निर्भया के चारों दोषियों अक्षय, विनय, पवन और मुकेश को फांसी हो चुकी है. 20 मार्च सुबह 5:30 बजे उन्हें सज़ा दी गई. तिहाड़ जेल के डायरेक्टर जनरल संदीप गोयल ने इस बात की पुष्टि की. ये भी कहा कि तिहाड़ के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि चार दोषियों को एक साथ फांसी दी गई.

बलात्कार

2012 में हुए निर्भया गैंगरेप-मर्डर के बाद देश के रेप कानूनों में सख्ती लाई गई. नाबालिगों के साथ होने वाले अपराधों के लिए अलग से POCSO कानून बना. पॉक्सो माने, प्रॉटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्शुअल ऑफेन्सेस ऐक्ट. अलग कानून इसलिए कि बच्चों के साथ होने वाले अपराधों का असर ज्यादा खौफनाक होता है. बच्चों को संभाले जाने, उनकी हिफाजत करने की ज्यादा जरूरत होती है. कानून है, पर लोग कह रहे हैं कि इसे और सख्त बनाया जाना चाहिए. बहुत लोग कह रहे हैं कि बच्चों के साथ बलात्कार करने पर सीधे फांसी दी जानी चाहिए. मैरिटल रेप के खिलाफ भी कानून बनाए जाने की मांग हो रही है. मैरिटल रेप, यानी जब शादीशुदा आदमी अपनी पत्नी के साथ जबर्दस्ती सेक्स करता है.

ये भारत की बात थी. दुनिया के और देशों में इन सब चीजों का क्या हाल है? इसे भी जानने की जरूरत है. खैर, आज हम आपको कुछ चर्चित मामलें बताने जा रहे हैं, जिन्हें बेहद जरुरी मान सकते हैं.

ये कानून भी समझ लें. अगर विक्टिम भी नाबालिग हो और रेपिस्ट भी नाबालिग हो, तब काफी नर्मी बरती जाती है. ऐसे मामलों में सुधार पर, काउंसलिंग पर ज्यादा जोर रहता है. वैसे इसे लेकर कोई एक सा कानून नहीं है. नाबालिग माने जाने की उम्र भी अलग-अलग देशों में अलग-अलग है.

कुछ चर्चित मामले

पहला

सियरा लियोन का एक केस सुर्खियों में आया था. 16 साल की एक लड़की थी. स्कूल में पढ़ती थी. उसका टीचर उसे अपने घर बुलाता था. कहता था, आओगी तभी परीक्षा में नंबर दूंगा. उसने उस लड़की के साथ बलात्कार किया. कई बार. वो प्रेगनेंट हो गई. विक्टिम के परिवार ने शिकायत की. टीचर का कुछ नहीं बिगड़ा. वो नौकरी करता रहा. उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई. मगर विक्टिम को स्कूल से निकाल दिया गया. क्यों? क्योंकि वो प्रेगनेंट थी. सियरा लियोन में ऐसा बहुत होता है. इसी वजह से वहां स्कूल से ड्रॉपआउट हुई लड़कियों की बड़ी तादाद है. ये लड़कियां कच्ची उम्र में मां बन जाती हैं. उनका और बलात्कार की वजह से पैदा हुए उस बच्चे का, दोनों का भविष्य खराब हो जाता है.

दूसरा

सोमालिया में एक घटना हुई. कुछ नाबालिग लड़कों ने मिलकर दो लड़कियों का बलात्कार किया. रेप का विडियो बनाकर उसे इंटरनेट पर डाल दिया. जब पकड़े गए, तो कहा पैसे ले लो.

तीसरा

बोलिविया. यहां एक ‘इसतुप्रो’ नाम का क्राइम है. इसमें होता क्या है कि अगर 14 साल से 18 साल के बीच की किसी लड़की का रेप हुआ है, तो रेपिस्ट की सजा कम हो जाती है. उसे कम दोषी माना जाता है. कानून मानता है कि शायद रेपिस्ट ने ललचाए जाने या जाल में फंसाए जाने पर रेप किया होगा. मतलब रेप करने वाली की गलती कम है. जिसका रेप हुआ है, गलती उसकी ज्यादा हुई. इसी हिसाब से केस भी दर्ज होता है. ट्रायल में पूरा जोर बलात्कार का शिकार हुई उस लड़की के कैरेक्टर पर होता है. कि उसका चरित्र कैसा है? कैसा था? ऐसे ही एक मामले में जज ने टिप्पणी करते हुए कहा था. कि लड़की बलात्कार के समय चीखी-चिल्लाई नहीं थी. इसका मतलब कि उसके साथ बलात्कार नहीं हुआ.

चौथा

केन्या में एक 16 साल की लड़की के साथ बलात्कार हुआ. गैंगरेप. फिर उसे मरने के लिए फेंक दिया. लड़की मर भी गई. उसके साथ ये सब करने वालों को घास काटने की सजा मिली. इस पर बाकी देशों में खूब खबर हुई. अंतरराष्ट्रीय दबाव में फैसला बदला गया. बलात्कारियों को गैंगरेप के लिए 15 साल जेल और उसे गंभीर नुकसान पहुंचाने के लिए सात साल जेल की सजा सुनाई गई.

पांचवा

इथियोपिया में एक 13 साल की लड़की से रेप हुआ. अदालत ने रेपिस्ट को बरी कर दिया. क्यों? क्योंकि जज को नहीं लगा कि वो लड़की ‘ताज़ी और कुआंरी’ थी. लड़की और उसके परिवार ने हिम्मत नहीं हारी. लड़ते रहे. 15 साल बाद अफ्रीकन कमिशन ने इथियोपिया के फैसले को गलत माना. कहा कि मुल्क उसे न्यायिक सुरक्षा नहीं दे सका. विक्टिम को हर्जाना दिया गया. मगर क्या न्याय हुआ?

ये महज़ कुछ चर्चित मामले थे. और न जाने कितने ऐसे मामले किसी रसूख-शख्सियत के दबाव में सिर्फ पीड़िता की सिसकियों तक सीमित रह जाते हैं. जिनपर विचार और सुविचार दोनों की जरुरत है.

नमस्कार।

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