Contact Information

Theodore Lowe, Ap #867-859
Sit Rd, Azusa New York

We Are Available 24/ 7. Call Now.

एक तरफ जहां दुनिया कोरोना वायरस महामारी से जूझ रही है. वहीं दूसरी तरफ अब एक नई मुसीबत आन पड़ी है. उस मुसीबत के लिए बस ये समझलो अब बस कुछ घंटे बाकी है, जब धरती के बगल से एक आफत गुजरेगी.

वैसे तो ये आफत धरती से लाखों किलोमीटर दूर से निकल रही है. लेकिन अंतरिक्ष में ये दूरी बहुत ज्यादा नहीं मानी जाती. वह भी तब जब सामने से आ रही आफत की स्पीड किसी रॉकेट से तीन गुनी ज्यादा हो. इस गति से अगर यह धरती या किसी भी ग्रह से टकराया तो बड़ी बर्बादी ला सकता है.

space

कोरोना से जूझ रही दुनिया के सामने ये नई मुसीबत अंतरिक्ष से आ रही है. इसे लेकर दुनिया भर के वैज्ञानिक परेशान हैं. अगर दिशा में जरा सा भी परिवर्तन हुआ तो खतरा भयानक होगा.

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने करीब डेढ़ महीने पहले खुलासा किया था कि धरती की तरफ एक बहुत बड़ा एस्टेरॉयड तेजी से आ रहा है. बताया जाता है कि यह एस्टेरॉयड धरती के सबसे ऊंचे पहाड़ माउंट एवरेस्ट से भी कई गुना बड़ा है. इतनी गति से यह अगर धरती के किसी हिस्से में टकराएगा तो बड़ी सुनामी ला सकता है. या फिर कई देश बर्बाद कर सकता है.

हालांकि, नासा का कहना है कि इस एस्टेरॉयड से घबराने की जरूरत नहीं है. क्योंकि यह धरती से करीब 63 लाख किलोमीटर दूर से गुजरेगा. अंतरिक्ष विज्ञान में यह दूरी बहुत ज्यादा नहीं मानी जाती। लेकिन कम भी नहीं है.

space

जिस समय यह एस्टेरॉयड धरती के बगल से गुजरेगा, उस समय भारत में दोपहर के 3:26 मिनट हो रहे होंगे. सूरज की रोशनी के कारण आप इसे खुली आंखों से नहीं देख पाएंगे.

इसके बारे में अंतरिक्ष विज्ञानी डॉक्टर स्टीवन प्राव्दो ने बताया कि उल्का पिंड 52768 सूरज का एक चक्कर लगाने में 1,340 दिन या 3.7 वर्ष लेता है. इसके बाद एस्टरॉयड 52768 (1998 OR 2) का धरती की तरफ अगला चक्कर 18 मई 2031 के आसपास हो सकता है. तब यह 1.90 करोड़ किलोमीटर की दूरी से निकल सकता है.

space

खगोलविदों के मुताबिक, ऐसे एस्टेरॉयड का हर 100 साल में धरती से टकराने की 50,000 संभावनाएं होती हैं. लेकिन, किसी न किसी तरीके से ये पृथ्वी के किनारे से निकल जाते हैं.

बता दें एक 40 मीटर लंबा उल्का पिंड 1908 में साइबेरिया के वायुमंडल में टकरा कर जल गया था. जिससे देश तबाही से बच गया था.

Share:

administrator