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आज के समय में हिंदुस्तान के सबसे अमीर शख्स हैं मुकेश अंबानी। मुकेश अंबानी, धीरूभाई अंबानी के बेटे हैं. धीरूभाई के दो बेटे हैं. मुकेश और अनिल।

लेकिन अनिल अंबानी का ग्राफ उतना नहीं बढ़ सका. जितना मुकेश अंबानी का बढ़ा. इसके पीछे की वजह को जानने की आज कोशिश करेंगे। और बात इस पर भी करेंगे कि आखिर दोनों भाइयों में कैसे दरार पड़ गई.

मतलब देश के सबसे अमीर भाइयों को क्यों करना पड़ा बंटवारा?

साल 2002 में अपने पिता धीरूभाई अंबानी की मौत के बाद दोनों भाइयों को अरबों की संपत्ति विरासत में मिली थी। धीरूभाई अंबानी अपने पीछे कोई वसीयतनामा नहीं छोड़ गए थे। धीरूभाई अंबानी के निधन के कुछ समय बाद ही यह प्रश्न उठने लगा कि इतने बड़े रिलायंस के साम्राज्य का असली उत्तराधिकारी कौन होगा?

इसके बाद मुकेश और अनिल के बीच दूरियां बढ़ती गईं। बीच में थी सिर्फ मां कोकिलाबेन। उन्होंने हरसंभव कोशिश की। बेटों में एक रहे परिवार में बंटवारा न हो इसके लिए उन्होंने देश के कई धार्मिक स्थलों की यात्राएं की।

जब यह स्पष्ट हो गया कि दोनों भाई साथ रह कर रिलायंस के साम्राज्य को नहीं चला सकते हैं. तब उनकी मां कोकिलाबेन अंबानी ने दोनों भाइयों के बीच संपत्ति का बंटवारा किया। ये बंटवारा भी उस समय चर्चा में रहा था। करीब 18 घंटे तक लगातार धीरूभाई अंबानी के निवास की सातवीं मंजिल पर चुनिंदा लोग इस दौरान मौजूद थे। किसी को भी बाहर जाने की इजाजत नहीं थी।

देश के सबसे बड़े औद्योगिक घराने के बंटवारे के बारे में भारत के साथ-साथ विश्वभर के मीडिया की निगाह लगी हुई थीं। घर के सामने मीडिया का जमावड़ा लगा रहा। जब बंटवारा हो गया तब कोकिलाबेन ने सिर्फ इतना कहा श्रीजी की कृपा से सब ठीक हो गया।

 

1- अलग होने के बाद क्या हुआ दोनों की कारोबारी दुनिया में?

2005 में मुकेश और अनिल की कारोबारी राहें अलग हुईं। तब मुकेश और अनिल अंबानी के पास लगभग बराबर संपत्ति थी। चूंकि अनिल को जो कंपनियां मिली थीं उनमें अंबानी परिवार का शेयर मुकेश की कंपनियों के मुकाबले कम था। इसलिए अनिल को एक बड़ी रकम नकद भी दी गई थी।

मुकेश के पास निर्माण, तेल रिफाइनरी और टैक्सटाइल जैसे मूल बिजनेस थे, तो अनिल का दांव टेलीकॉम, एनर्जी और इंटरटेनमेंट जैसे भविष्य के बिजनेस पर था। यानी अनिल के पास भविष्य के कारोबार की जमीन और बड़ी नकदी थी। 12 साल बाद दोनों के बीच का फर्क काफी बढ़ चुका है। इस बीच मुकेश ने अपने मूल कारोबार में मुनाफे को सूत्र बनाया। वहीं अनिल ने कई क्षेत्रों में पैसा लगाया।

 

2- क्या फर्क है दोनों भाइयों की शख्सियत में?

मुकेश अंतर्मुखी हैं और बाहरी दुनिया के लोगों से ज्यादा मेलजोल में असहज महसूस करते हैं। वहीं अनिल को ग्लैमर लुभाता है। मुकेश के लिए कारोबार अपने आप में पूरी दुनिया है, तो अनिल के लिए कारोबार अपनी सोच को पूरा करने का जरिया। मुकेश के विपरीत अनिल अपनी फिटनेस को लेकर भी काफी संजीदा रहते हैं। अनिल के दोस्तों की फेहरिस्त में बॉलीवुड, राजनीति से लेकर क्रिकेट जगत तक की बड़ी हस्तियां शुमार हैं।

वे एक बार राज्यसभा में भी जा चुके हैं। अनिल अपने संबंधों को छुपाते भी नहीं हैं। वहीं, मुकेश सीधे तौर पर किसी राजनीतिक दल से संबंद्ध नहीं हैं और उनकी दोस्तियों में कारोबारी नफा-नुकसान प्राथमिकता होती है। मुकेश अपने सार्वजनिक जीवन में मेल-जोल को लेकर सचेत रहते हैं।

 

 

कड़वाहट की असली वजह

1- लेखक हेमिश मैक्डोनाल्ड ने अपनी किताब अंबानी एंड संस में खुलासा किया कि धीरूभाई अंबानी ने अपने उत्तराधिकारी के रूप में अपने बेटों की भूमिका तय नहीं की थी।

बता दें 2002 के बाद मुकेश अंबानी रिलायंस इंडस्ट्री के चेयरमैन बने थे।

2- छोटे भाई अनिल को मुकेश अंबानी से मिलने के लिए उनके सचिव से समय लेना होता था। जो अक्सर नहीं मिलता था। घर पर मुकेश कारोबार की कोई बात ही नहीं करते थे।

3- 2004 में दोनों भाइयों के बीच की ये दूरी सार्वजनिक हो गई। जब अनिल ने अपना हक मांगा था।

4- 2005 में दोनों भाइयों में सुलह कराने की कोशिश मां कोकिलाबेन ने की। लेकिन 2006 में बंटवारा हो ही गया।

5- उसके बाद भी विवाद चलते ही रहे। अनिल की टेलिकॉम कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशन ने जब दक्षिण अफ्रीकी कंपनी एमटीएन के साथ मर्जर की बातचीत शुरू की तो मुकेश भी कंपनी में अपना हक जताने लगे।

6- उसके बाद कावेरी बेसिन से मिलने वाली गैस को लेकर भी दोनों भाइयों के बीच कोर्ट में लंबी लड़ाई चली।

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