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समाजवादी पार्टी के पूर्व नेता और राज्यसभा सांसद अमर सिंह का शनिवार को निधन हो गया. बीते कुछ महीनों से बीमारी से जूझ रहे अमर सिंह ने सिंगापुर के एक अस्पताल में भर्ती थे. भारतीय राजनीति में अमर सिंह एक ऐसा नाम थे, जिनकी हर पार्टी के नेताओं से अच्छे संबंध थे. उत्तर प्रदेश से अपना राजनीतिक सफर शुरू करने वाले अमर सिंह कभी मुलायम सिंह के दाहिने हाथ माने जाते थे.

लेकिन खराब सेहत के चलते अमर सिंह पिछले कुछ वर्षों से राजनीति में एक्टिव नहीं थे. लेकिन एक दौर ऐसा भी था जब अमर सिंह अपने बयानों से तहलका मचा देते थे. उन्होंने कई ऐसे बयान दिए जो चर्चा का विषय बने.

अमिताभ बच्चन पर तल्ख़ बयान

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अमर सिंह, अमिताभ बच्चन के सबसे करीबी लोगों में गिने जाते थे. ये बात भी किसी से छुपी नहीं है, कि बिग बी के मुश्किल वक्त में अमर सिंह ने ही उन्हें सबसे ज़्यादा मदद की थी.

लेकिन अमर सिंह ने एक बार कहा था कि अमिताभ बच्चन को पद्म विभूषण दिया जाना दिलीप कुमार का अपमान है. एक म्यूजिक एल्बम की लॉन्चिंग पर अमर सिंह ने कहा था कि अमिताभ बच्चन एक ऐसे एक्टर हैं. जो कई क्रिमिनल केसों में लिप्त हैं. यही नहीं, पनामा पेपर्स विवाद में भी उनका नाम आ चुका है. लेकिन अमर सिंह के इस बयान पर अमिताभ बच्चन की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई थी.

जब जया बच्चन पर दिया विवादित बयान

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साल 2016 में देश में बीफ पर विवाद छिड़ा था, तब अमर सिंह ने कहा था कि जया बच्चन ने बीफ खाया है. अमर सिंह ने पत्रकारों से बातचीत में कहा था कि कौन क्या पहनता है, क्या खाता है, इस बात पर झगड़ा और हत्या नहीं होनी चाहिए. एक प्रतिनिधिमंडल ग्लासगो गया था, उसमें जया बच्चन भी थीं. वहां सभी लोगों ने गाय और सूअर, दोनों का मांस खाया था. यूके के लिए वो गाय और सूअर नहीं, पोर्क और बीफ है.

आजम खान और अमर सिंह…

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अमर सिंह और आजम खान के रिश्ते जगजाहिर हैं. दोनों के संबंध कभी मधुर नहीं रहे. अमर सिंह ने कुछ साल पहले आजम खान के एक बयान की कड़ी निंदा की थी. उन्होंने कहा कि आजम खान पर ईश-निंदा का केस चलना चाहिए. उन्हें जेल में रखना चाहिए. पता नहीं क्यों ये देश उन्हें बर्दाश्त कर रहा है. ऐसे कई मौके रहे जब अमर सिंह ने आजम खान पर सीधा निशाना साधा था.

जब सरकार बचाने के लिए आगे आए अमर सिंह

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अमर सिंह को 2009 में समाजवादी पार्टी ने पार्टी से निकाल दिया था और 2011 में तथाकथित वोट फॉर कैशघोटाले में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. उन पर यूपीए सरकार को बचाने के लिए सांसदों को घूस देने का आरोप था, जब यूपीए के सहयोगी वाम मोर्चे ने भारत-अमेरिका परमाणु समझौते से नाइत्तेफाकी की वजह से समर्थन वापस ले लिया और लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव रखा था, तो अमर सिंह ही मनमोहन सरकार को बचाने के लिए आगे आए थे.

मुलायम और अमर

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अमर सिंह ने मुलायम सिंह यादव के साथ अपने रिश्ते को खासी अहमियत दी. सपा से उनके निष्कासन के बाद भी नहीं टूटा. अमर सिंह ने इस रिश्ते को लेकर एक बार कहा था कि जब मुलायम ने कहा था कि मैं उनकी पार्टी में भले न होऊं पर उनके दिल में था, जब एक पुराना दोस्त कहता है कि मुझे तुम्हारी कमी खलती है”, तो मैं भला कैसे न लौटता.” अमर डंके की चोट पर कहते थे. वे मुलायमवादी” हैं. उनकी वफादारी नेता के प्रति है, पार्टी के प्रति नहीं.

सपा से नाराज और बीजेपी के करीब

साल 2017 के उस दौर को याद करिए जब सपा में जंग छिड़ी थी. पार्टी में इस लड़ाई के अखिलेश यादव ने अमर सिंह को जिम्मेदार ठहराया था और पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया. इसके बाद तो अमर सिंह, अखिलेश पर हमलावर ही रहे.

सपा से बाहर होने के बाद कई मौके पर उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की जमकर तारीफ की. जया प्रदा को बीजेपी में लाने के पीछे भी अमर सिंह का ही हाथ माना जाता है. अपने पूरे राजनीतिक जीवन में अमर सिंह बीजेपी पर हमलावर रहे, लेकिन आखिरी दिनों में वो जिस तरह से बीजेपी के करीब आए वो हर किसी को हैरान कर देने वाला था.

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