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क्रिकेट… ये एक ऐसा शब्द है. जो दुनियाभर की लगभग 70 फीसदी और हिंदुस्तान की 100 फीसदी आबादी पर अकेले हुकूमत चलाता है. इस खेल के पीछे इसके रोचक और रोमांच का अपने चरम पर होना है. वैसे तो बहुत कम ही लोग होंगे। जिन्हें इस खेल के बेहतरीन खिलाड़ियों के बारे में न पता होगा।

लेकिन आज बात एक ऐसे खिलाड़ी की होगी। जिसके नाम बेहद हैरतअंगेज रिकॉर्ड दर्ज है.

मौजूदा दौर में अलबर्ट ट्रॉट का नाम भले ही अनजाना-सा लगता हो. लेकिन इस क्रिकेटर के नाम बड़े चौंकाने वाले रिकॉर्ड हैं. हैरानी वाली बात तो यह है कि ऑस्ट्रेलिया में पैदा हुए इस ऑलराउंडर ने 41 साल की उम्र में खुद को गोली मार ली थी. लेकिन आज भी ट्रॉट के हैरतअंगेज कारनामे रोमांचित करते हैं.

cricket

ऑस्ट्रेलिया-इंग्लैंड दोनों के लिए टेस्ट क्रिकेट खेला

करिश्माई क्रिकेटर ट्रॉट का टेस्ट करियर महज पांच टेस्ट मैच का रहा. उन्होंने ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड दोनों के लिए टेस्ट क्रिकेट खेला. (3 टेस्ट ऑस्ट्रेलिया और 2 टेस्ट इंग्लैंड की ओर से). ट्रॉट ने जनवरी 1895 में एडिलेड में इंग्लैंड के खिलाफ डेब्यू किया था.

टेस्ट डेब्यू- एक पारी में 8 विकेट लेने वाले पहले बॉलर

ट्रॉट अपने पहले ही टेस्ट की एक पारी में 8 विकेट लेने वाले पहले गेंदबाज बन गए थे. उनके बाद से डेब्यू टेस्ट की पारी में अबतक 8 गेंदबाजों ने 8-8 विकेट झटके हैं. लेकिन सबसे कम रन देकर 8 विकेट लेने का रिकॉर्ड आज भी दाहिने हाथ के स्लो बॉलर ट्रॉट के नाम है.

डेब्यू टेस्ट- एक पारी में सबसे किफायती 8 विकेट लेने वाले

1. अलबर्ट ट्रॉट (ऑस्ट्रेलिया) : 27 ओवर, 10 मेडन, 43 रन, 8 विकेट, 1895 (विरुद्ध इंग्लैंड- एडिलेड)

2. बॉब मेसी (ऑस्ट्रेलिया) : 27.2 ओवर, 9 मेडन, 53 रन, 8 विकेट, 1972 (विरुद्ध इंग्लैंड- लॉर्ड्स)

3. नरेंद्र हिरवानी (भारत) : 18.3 ओवर, 3 मेडन, 61 रन, 8 विकेट, 1988 (विरुद्ध वेस्टइंडीज- चेन्नई)

…तो इसलिए ऑस्ट्रेलिया छोड़कर इंग्लैंड चले गए

अलबर्ट ट्रॉट ने ऑस्ट्रेलिया की ओर से तीन टेस्ट में 102.50 की औसत से रन बनाए. फिर भी ऑस्ट्रेलियाई सलेक्टर्स ने उन्हें तवज्जो नहीं दी और 1896 के दौरे के लिए टीम में नहीं चुना. इसके बावजूद ट्रॉट ने हिम्मत नहीं हारी और वह खुद के खर्च पर इंग्लैंड चले गए. जहां उन्हें काउंटी क्रिकेट में मिडिलसेक्स की तरफ से खेलने का मौका मिल गया. इसी के बाद 1899 में ट्रॉट ने इंग्लैंड की ओर से दक्षिण अफ्रीका में 2 टेस्ट खेले.

लॉर्ड्स में सबसे बड़ा छक्का लगाने वाले एकमात्र क्रिकेटर

Albert Trott

1899 में जब ऑस्ट्रेलिया की टीम इंग्लैंड दौरे पर आई तो ट्रॉट ने जबर्दस्त धमाका किया. दरअसल, लॉर्ड्स में 31 जुलाई को एमसीसी और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले गए मैच में ट्रॉट ने ऑस्ट्रेलिया के मॉन्टी नोबल की गेंद पर ऐसा छक्का जमाया कि इतिहास बना गया. ट्रॉट लॉर्ड्स के पवेलियन के ऊपर से छक्का (120 मीटर) जड़ने वाले एकमात्र खिलाड़ी हैं.

प्रथम श्रेणी क्रिकेट की एक पारी में दो हैट्रिक का कारनामा

1892-1910 के दौरान ट्रॉट ने 375 प्रथम श्रेणी मैच खेले. विक्टोरिया और मिडिलसेक्स उनकी टीमें रहीं. उन्होंने 21.09 की औसत से 1674 विकेट लिए. मिडिलसेक्स ने 1907 में ट्रॉट का बेनिफिट मैच कराया, समरसेट के खिलाफ लॉर्ड्स में ट्रॉट का चमत्कारी प्रदर्शन आज भी हैरान करता है. दरअसल, ट्रॉट प्रथम श्रेणी की एक ही पारी में दो हैट्रिक लेने वाले पहले गेंदबाज बन गए थे.

-मैच के तीसरे दिन समरसेट को जीत के लिए 264 रन चाहिए थे. उम्मीद थी कि इस बेनिफिट मैच के आखिरी दिन दोपहर बाद दर्शक जुटेंगे. लेकिन वह मैच ट्रॉट की एक के बाद एक – दो हैट्रिक की वजह से बहुत जल्दी खत्म हो गया. ट्रॉट के लिए धन नहीं उगाहा जा सका. यानी ट्रॉट ने खुद का घाटा करा लिया.

-हुआ यूं कि समरसेट की टीम ने लक्ष्य का पीछा करते हुए 77/2 रन बनाए थे. ट्रॉट ने हैट्रिक ली और स्कोर 77/6 हो गया. इसके बाद स्कोर 97/7 रन था, तो एक बार फिर ट्रॉट ने हैट्रिक लेकर पूरी टीम समेट दी. ट्रॉट का गेंदबाजी विश्लेषण रहा- 8-2-20-7.

रोचक FACT…

अलबर्ट ट्रॉट के बाद प्रथम श्रेणी क्रिकेट की पारी में दो हैट्रिक लेने का कारनामा जोगिंदर राव ने किया. 1963-64 में नॉर्दर्न पंजाब के खिलाफ अमृतसर में उन्होंने अपने दूसरे मैच में ही यह उपलब्धि हासिल की. सेना की ओर से खेलते हुए जोगिंदर ने दिल्ली में जम्मू-कश्मीर के खिलाफ डेब्यू में भी हैट्रिक ली थी.

बीमारी के बाद डिप्रेशन में चले गए थे, खुदकुशी की

ट्रॉट पहले ही टेस्ट खेलने की होड़ से बाहर थे. 1910 में उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट से भी खुद को अलग कर लिया और अंपायरिंग में हाथ आजमाया. इस बीच वह ड्रॉप्सी (जलोदर- पेट में पानी भरना) नामक बीमारी के शिकार हुए. धीरे-धीरे ट्रॉट ज्यादा शराब पीने लगे. इसके बाद लगातार डिप्रेशन में रहे. आखिरकार ट्रॉट ने 30 जुलाई 1914 को खुद को पिस्टल से गोली मार ली.

Albert Trott

ट्रॉट का अंत भले ही दर्दनाक रहा हो. लेकिन इस बेहतरीन खिलाड़ी ने शुरुआत में बड़े-बड़े झंडे गाड़ दिए थे.

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