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भारत ने महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में जीत के कइयों झंडे गाड़े. इस दौरान भारतीय टीम का सामना कई धाकड़ टीम्स से भी हुआ. लेकिन सभी को नाको चना चबाना पड़ गया. कुछ ऐसा ही सफर 2013 के चैंपियंस ट्रॉफी का रहा. जोकि “डोगुना लगान देना परेगा” यानी इंग्लैंड की सरजमीं पर हुआ था. सीरीज के जीतने में कप्तान धोनी का बहुतै बड़ा रोल रहा.

रवि बोपारा

वही महेंद्र सिंह धोनी. 2011 वर्ल्ड कप के फाइनल में श्रीलंका के खिलाफ छक्का मारकर वर्ल्ड कप जिताने वाला हीरो. क्या कभी सोचा है कि इस वर्ल्ड कप जीत से बड़ी जीत धोनी ने 2013 में दिलवाई थी. टीम इंडिया के लिए वर्ल्ड कप फाइनल से ज्यादा मुश्किल फाइनल 2013 चैंपियंस ट्रॉफी में था. बर्मिंघम के मैदान पर टीम इंडिया ने एक हारा हुआ फाइनल जीता था. वो भी पहली बार.

23 जून 2013 का दिन था. इंग्लैंड की धरती पर टीम इंडिया उस चैंपियंस ट्रॉफी का फाइनल खेलने उतरी थी, जिसमें वो कभी नहीं जीती थी. बस एक बार (2002) श्रीलंका के साथ जॉइंट विनर बनी थी. इस बार धोनी की टीम ट्रॉफी को अपना करने के मूड में थी. मगर यहां हो गई झमाझम बारिश. इतनी बारिश कि लगा अब मैच हो ही नहीं पाएगा. ये ट्रॉफी इसलिए भी जरूरी थी. क्योंकि आईसीसी इसे 2013 के बाद से बंद करने के मूड में थी.

रवि बोपारा

बारिश रुकी और अंपायरों ने फील्ड का मुआयना करके इसे 20-20 ओवरों का मैच कराने का ऐलान किया. टॉस जीतकर इंग्लैंड ने फील्डिंग का फैसला किया. इंडिया की बैटिंग नहीं चली. शिखर धवन ने 31, विराट कोहली ने 43 और जडेजा ने नाबाद 33 रन बनाए. इंडिया ने 20 ओवरों में 129 का स्कोर बनाया. यानी इंग्लैंड को 130 का लक्ष्य मिला. स्कोरबोर्ड पर 20 ओवरों में इतने रन देखकर सभी ने समझ लिया कि इंडिया ये मैच हारेगी.

अपना ये मामूली स्कोर बचाने के लिए टीम इंडिया मैदान पर उतरी. मगर यहां धोनी हार मानने वाले नहीं थे. धोनी ने रविंद्र जडेजा को पहला ओवर देकर पारी की शुरुआत में ही इंग्लैंड को चौंका दिया. दूसरे ओवर में रवि अश्विन ने विकेट निकाल लिया. 9 ओवर होते-होते इंग्लैंड के 4 विकेट सिर्फ 46 के स्कोर पर गिर गए. मगर यहां ऑयन मोर्गन और रवि बोपारा टिक गए. दोनों स्कोर को 110 पर ले आए. अब लगा कि इंग्लैंड ये मैच निकाल लेगा.

मगर धैर्यवान धोनी के दिमाग में जीत दिख रही थी. अश्विन को अटैक में वापिस लाए और दो गेंदों पर दो विकेट. दोनों टिके हुए बल्लेबाजों को दो गेंदों पर निपटा दिया. 110 के स्कोर पर इंग्लैंड के 6 विकेट उड़ गए. 112 पर 7वां विकेट गया और 113 पर 8वां. इस तरह 7 गेंदों पर इंग्लैंड के चार विकेट झड़ गए और इंडिया ये लगभग हारा हुआ मैच 5 रनों से जीत गई.

रवि बोपारा

वैसे 2007 में धोनी की कप्तानी में टीम वर्ल्ड टी-20 भी 5 रन से ही जीती थी. रवींद्र जडेजा को 33 रनों की नाबाद पारी और दो विकेट लेने के लिए मैन ऑफ द मैच दिया गया. उस सीरीज में सबसे ज्यादा रन बनाने के लिए शिखर धवन को मैन ऑफ द सीरीज दिया गया.

रवि बोपारा

इस ट्रॉफी के फाइनल में मिली जीत को इसलिए भी बड़ा माना गया. क्योंकि ये एक फंसा हुआ मैच था. जबकि वर्ल्ड कप फाइनल में हमेशा टीम इंडिया विनिंग पॉजिशन में थी. इसके अलावा चैंपियंस ट्रॉफी में सारे मैच नॉकआउट फॉरमेट में खेले गए. यानी एक मैच हारते ही टीम बाहर. मगर टीम ने अपने ग्रुप का पहला मैच साउथ अफ्रीका, दूसरा वेस्टइंडीज, तीसरा पाकिस्तान और चौथा श्रीलंका को हराकर फाइनल में इंग्लैंड को हराया और ये ट्रॉफी जीती.

तो मतलब यहां कप्तान धोनी की जीत हुई थी.

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