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अमिताभ बच्चन और राजेश खन्ना के लिए मील का पत्थर साबित हुई ‘आनंद’ फिल्म को लोग आज भी खूब पसंद करते हैं. इस फिल्म में दोनों के किरदारों ने उन्हें रातों-रातों स्टार बना दिया था. लेकिन आज हम बात करने जा रहे हैं कि आखिर ‘आनंद’ फिल्म कैसे बनकर तैयार हुई. क्योंकि शुरुआत में इस फिल्म से राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन का दूर-दूर तक कोई नाता नहीं था.

तो आइये जानते हैं मज़ेदार किस्से…

दरअसल, ‘आनंद’ वही फिल्म है, जिसमें राजेश खन्ना ने एक खुशमिजाज कैंसर पेशेंट का रोल किया था. पेशेंट के दोस्त और डॉक्टर भास्कर का रोल किया था अमिताभ बच्चन ने. जो उन्हें बचाने की भरसक कोशिश करते हैं. लेकिन बचा नहीं पाते. आखिर में आनंद की मौत हो जाती है. ऋषिकेश मुखर्जी की फ़िल्म ‘आनंद’ कहानी, डायलॉग्स और इमोशन की वजह से हिंदी सिनेमा की एक यादगार फ़िल्म मानी जाती है.

लेकिन इस फिल्म से जुड़े किस्से भी शानदार हैं. बॉलीवुड के हीमैन धर्मेंद्र ने एक किस्सा सुनाया था. जोकि कुछ ऐसे था.

धर्मेंद्र के मुताबिक,‘ऋषिकेश मुखर्जी तब फिल्म ‘आनंद’ बनाने की तैयारी कर रहे थे. हम फ्लाइट से बेंगलुरु से मुंबई आ रहे थे. तब उन्होंने मुझे फिल्म की कहानी सुनाई, कहा ये करेंगे, वो करेंगे. लेकिन कुछ वक्त बाद पता चला कि फिल्म राजेश खन्ना के साथ शुरू हो चुकी है. मैं तो फिर थोड़ी टिकाता (शराब पीता) हूं न. मैंने सारी रात ऋषि दा को सोने नहीं दिया. मैं बार-बार फोन करके, ताना देते हुए, पेग लगाते हुए, कह रहा था – “मेरे को रोल दे रहे थे आप.. मेरे को कहानी सुनाई थी आपने (फिल्म राजेश खन्ना के साथ शुरू कर दी) वो सब कहां गया ऋषि दा?’ वो फोन बंद करते थे. मैं आधे घंटे बाद दोबारा लगा देता था. वो फोन उठाकर (हाथ जोड़ने की मुद्रा में) कहते – ओ, सो जा धरम जो सा, सो जा प्लीज़. मैं कहता – नहीं, मेरी पिक्चर उसको (राजेश खन्ना) को क्यों दे दी.’

राज कपूर की बीमारी पड़ गई भारी

लेकिन धर्मेंद्र इकलौते नहीं थे, जिनके हाथों से फिल्म ‘आनंद’ फिसली हो. दरअसल ऋषिकेश मुखर्जी राज कपूर के साथ ये फिल्म बनाना चाहते थे. तब राज कपूर और ऋषिकेश बहुत खास दोस्त भी हुआ करते थे. लेकिन उस दौरान राज कपूर भयंकर रूप से बीमार पड़ गए. और ऋषिकेश मुखर्जी काफी डर गए. वह नहीं चाहते थे कि राज कपूर को मरते हुए दिखें. भले ही वो फ़िल्म ही क्यों न हो. इसलिए राज कपूर को फिल्म छोड़नी पड़ी.

उसके बाद फिल्म राज कपूर के छोटे भाई शशि कपूर को ऑफर हुई. लेकिन उन्हें किरदार में मजा नहीं आया और उन्होंने फिल्म करने से इंकार कर दिया. तब तक भी राजेश खन्ना का नंबर नहीं आया था. ऋषिकेश मुखर्जी ने किशोर कुमार और बंगाली फिल्मों के स्टार उत्तम कुमार तक को आनंद का रोल ऑफर किया, लेकिन कहीं बात नहीं बनी.

जब ऋषिकेश मुखर्जी को गार्ड ने भगा दिया

अब ऋषिकेश मुखर्जी के हाथ से ‘आनंद’ कैसे निकली, इसका भी एक बहुत मजेदार किस्सा है. हुआ ये कि किशोर कुमार ने एक बंगाली प्रोड्यूसर के साथ एक स्टेज शो किया था. वो पैसे देने में ना-नुकर कर रहा था. इस बात पर किशोर कुमार से उसकी लड़ाई हो गई. गुस्से में घर लौटे किशोर ने अपने गार्ड को कहा कि कोई बंगाली मुझसे मिलने आए तो उसे भगा देना.

इसी समय अपनी फिल्म से जुड़ी कुछ चीज़ें डिस्कस करने ऋषिकेश मुखर्जी आ धमके. गार्ड ने आव देखा, न ताव और ऋषिकेश मुखर्जी को बुरा-भला बोलकर घर से बाहर निकाल दिया. इस बात से ऋषि दा बहुत नाराज हुए और किशोर कुमार के साथ फिल्म बनाने का इरादा भी छोड़ दिया. कुशोर कुमार को जब ये बात पता चली, तो पहले तो उन्होंने अपना सिर पीट लिया और घर पहुंच कर गार्ड को नौकरी से निकाल दिया.

आधे पैसे में आधा किशोर…

किशोर कुमार का फिल्म से जुड़ा एक किस्सा कुछ और बताता है. वो भी जान लीजिए. किशोर कुमार को फिल्म की कहानी तो पसंद आई लेकिन वह एंडिंग से खुश नहीं थे. वह नहीं चाहते थे कि फिल्म में ‘आनंद’ की मौत हो. खैर सहमति और असहमति के बीच फिल्म की शूटिंग शुरू हो गई. लेकिन फिर बात आकर फंस गई पैसों पर. किशोर कुमार चाहते थे कि उन्हें पूरी फीस मिल जाए. लेकिन ऋषिकेश मुखर्जी दो किस्तों में पैसे देना चाहते थे.

मामला कोर्ट पहुंचा और किशोर कुमार को फिल्म पूरी करने का आदेश मिला. लेकिन अगले दिन जब वो सेट पर पहुंचे तो सब हैरान थे. किशोर कुमार आधे बाल मुंडवाकर सेट पर पहुंचे थे. ऋषिकेश मुखर्जी को देखकर उन्होंने कहा, ‘आधे पैसों में तो आधा किशोर ही मिलेगा’. फिल्म की शूटिंग रुक गई और दोबारा शुरू नहीं हो सकी. आखिरकार आनंद का रोल राजेश खन्ना की झोली में आया.

‘पैकअप’

राजेश खन्ना बॉलीवुड में अपनी लेट-लतीफी के लिए मशहूर थे.‘आनंद’ के सेट पर वो आमतौर पर थोड़ा-बहुत लेट हमेशा हो जाया करते थे. एक बार उनका इंतजार करते हुए थोड़ा ज़्यादा वक्त हो गया. ऋषि दा सेट पर बैठे चेस खेलते रहे. जैसे ही राजेश खन्ना आए ऋषि दा ने उन्हें कॉस्ट्यूम-मेकअप के लिए भेज दिया. राजेश खन्ना जैसे ही तैयार होकर बाहर आए ऋषिकेश मुखर्जी ने कहा ‘पैक अप’.

फिल्म मेकिंग वाले प्रोसेस में पैक अप का मतलब होता है- ‘शूटिंग समाप्ति की घोषणा’. पहले तो सेट पर सन्नाटा पसर गया. फिर राजेश खन्ना ने ऋषि दा से ये कहते हुए माफी मांगी कि अब ये दोबारा नहीं होगा. और वो दोबारा कभी नहीं हुआ.

धर्मेंद्र कहते हैं…

ऋषिकेश मुखर्जी को रातभर परेशान करने के बाद दोनों के रिश्ते में तल्खी नहीं आई. दोनों ने एकसाथ साथ गुड्डी (1971), चुपके-चुपके और चैताली (1975) को मिलाकर कुल छह फिल्में कीं. अगस्त, 2006 में लंबी बीमारी के चलते ऋषिकेश मुखर्जी की मौत हो गई. आखिरी दिनों में उनसे मुलाकात को याद करते हुए धर्मेंद्र ने एक इंटरव्यू में कहा था,

‘मैं आज भी वह दिन भूल नहीं पाता, जब वह बहुत बीमार थे और मैं उनसे मिलने पहुंचा तो उन्होंने मुझे कहा था, जो भी मेडिकल पाइप लगी है, इसे निकाल दो धरम, मुझे मुक्ति दे दो. वह मेरे लिए गुरु, मेंटर और दोस्त भी थे. वह मुझे इतना प्यार देते थे कि कभी डांट भी देते थे. कभी प्यार भी करते थे. भाई भी थे. मास्टर भी थे. मैं उनको बहुत सम्मान करता हूं.’

बता दें इस फिल्म ने राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन को इंडस्ट्री स्थापित कर दिया था. आज भी लोगों के जहन में ‘आनंद’ का रोल हमेशा के लिए बस गया.

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