Contact Information

Theodore Lowe, Ap #867-859
Sit Rd, Azusa New York

We Are Available 24/ 7. Call Now.

एक प्रसिद्ध डायलाग है, ‘कोई धंधा छोटा या बड़ा नहीं होता और धंधे से बड़ा कोई धर्म नहीं होता’। ठीक यही किया गौतम अडानी ने। समय पर जो धंधा मिला उसे पूरे मन किया और आगे बढ़ते रहे। जमीन पर पड़ा कोई असफल व्यक्ति कभी नजर नहीं आता, हर कोई उगते सूरज को सलाम करता है।

और कहीं वह दोपहर के सूरज की तरह तप रहा हो, सबकी आंखें चौंधिया देता है। ऐसी ही एक कामयाब शख्सियत का नाम है गौतम अडानी.

गौतम अडानी

गौतम अडानी का जन्म गुजरात के अहमदबाद में 24 जून 1962 को हुआ था। अगर इनके परिवार की बात कर तो यह छह भाई-बहन थे। बहुत कम लोगों को यह पता होगा कि अडानी का परिवार पहले आर्थिक रूप से बहुत कमजोर हुआ करता था। अपेक्षाकृत रूप से गरीब होने के कारण इनका परिवार अहमदाबाद के पोल इलाके के शेठ चॉल में रहता था।

बात सन् 1980 के दशक की है। उस समय अडानी के पास खुद का स्कूटर भी नहीं हुआ करता था, बल्कि वह अपने बचपन के साथी मलय महादेविया के स्कूटर पर पीछे बैठे लोगों को दिख जाया करते थे। इस दोस्ती की एक खास वजह अडानी कमजोर अंग्रेजी भी थी क्योंकि महादेविया की इंग्लिश अच्छी थी। बाद में महादेविया उनके बिजनेस पार्टनर हो गए। वर्तमान में अडानी भारत के उन गिने-चुने कामयाब उद्योगपतियों में एक हैं।

परिवार के खर्च पूरा करने के लिए नौकरी किया

हर यूथ के तरह अडानी भी अपनी स्कूली पढ़ाई करने के बाद ग्रेजुएशन की पढ़ाई के गुजरात यूनिवर्सिटी में एडमिशन ले लिए। ग्रेजुएशन के दिनों में उनके घर के सामने रोजी-रोटी का संकट आ खड़ा हुआ। चिंताजनक स्थितियों में पढ़ाई छूट गई। वह कॉलेज से मुंह मोड़कर पैसा कमाने के चुनौतीपूर्ण सफर पर निकल पड़े। अपना शहर छोड़कर मुंबई चले गए और वहां एक डॉयमंड कंपनी में बड़ी मामूली सी पगार पर नौकरी करने लगे। लेकिन, अडानी मुंबई केवल नौकरी करने के लिए नहीं आये थे। वह आये थे व्यापार करने। उन्होंने कुछ समय बाद नौकरी छोड़ दिया।

बिजनेस करने के लिए छोड़ दी नौकरी

अडानी ने एक सपना देखा था, वह सपना था. अपने परिवार को गरीबी से निकालने का। यह नौकरी से संभव नहीं हो सकता था, क्योंकि एक बधी-बधाई सैलरी में परिवार के 8 लोगो का खर्च निकालना मुश्किल हो रहा था। अडानी ने नौकरी छोड़ दिया। फिर शुरु हुआ फर्श से अर्श पर पहुँचने के लिए कड़ी मेहनत का दौर।

…जब फाड़ दिया त्यागपत्र

बात 1990 के दशक के आखिरी की है। अडानी एक्सपोर्ट कंपनी के एक एंप्लॉई ने शुगर ट्रेडिंग के सिलसिले में एक गलत फैसला लिया, जिसके नतीजतन कंपनी को 20 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। खुद को नौकरी से निकाले जाने के डर से इस एंप्लॉई ने पहले ही अपनी यह भारी गलती के लिए माफी मांग ली और अपने इस्तीफे का लेटर भी दे दिया। उस वक्त अपने 30 से ज्यादा की उम्र के रहे गौतम अडानी ने इस एंप्लॉई के त्यागपत्र को फाड़ डाला और उससे मुस्कुराते हुए कहा- मुझे पता है कि आपको इस घटना से जो सीख मिली है. उससे आप भविष्य में ऐसी गलती फिर कभी नहीं करेंगे, तो ऐसे में मैं आपके अगले एंप्लॉयर को आपकी इस सीख का फायदा क्यों उठाने दूं, जबकि इसके लिए घाटा तो मैंने उठाया है?

स्कूटर से घूमते थे बचपन के दोस्त के साथ

आज चर्चा में आए गौतम अडानी कुछ ऐसे ही थे। अहमदाबाद के इस अप्रत्याशित अरबपति के बारे में उनके पुराने साथी अब भी उनके बीते दिनों को याद करते हैं। वे बताते हैं कि 1980 के दशक में गौतम अडानी अपने ग्रे कलर के बजाज सुपर स्कूटर से पीछे अपने बचपन के दोस्त मलय महादेविया के साथ कैसे घूमा करते थे। मूल रूप से पेशे से डेंटिस्ट रहे मलय अब अडानी ग्रुप के साथ अडानी पोर्ट और SEZ लिमिटेड में डायरेक्टर की हैसियत से जुड़े हुए हैं। मलय महादेविया अपने दोस्त अडानी के साथ एक अहम भूमिका निभाया करते थे। वजह यह थी कि अडानी खुद को इंग्लिश में ज्यादा कंफर्टेबल नहीं पाते थे और उन्हें सरकारी अधिकारियों से बातचीत करने में परेशानी महसूस होती थी।

कई प्राइवेट प्लेन हैं अडानी के पास

आज अडानी जिस मुकाम पर खड़े हैं वह हतप्रभ करने वाली है। कॉलेज के ड्रॉप आउट रहे गौतम अडानी ने मारुति-800 से अपना सफर शुरू किया था जो अब बीएमडब्ल्यू गाड़ियों के बेड़े और एक फरारी पर पहुंच चुका है। इसके अलावा उनके पास 3 हेलिकॉप्टरों के साथ-साथ 3 बोम्बार्डियर और बीचक्राफ्ट विमान भी हैं जिनकी सीटों की क्षमता 8, 37 और 50 है।

आम आदमी पार्टी नेता अरविंद केजरीवाल ने अडानी के इन्हीं में से एक प्लेन से बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को उतरते हुए उनकी तस्वीर जारी करते हुए हमला बोला था। केजरीवाल ने मोदी की कथित ‘घोर पूंजीवादी’ नीतियों का फायदा गौतम अडानी और मुकेश अंबानी जैसे उद्योगपतियों को मिलने का आरोप कई बार लगाया है।

हाल में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी इसमें शामिल हो गए और उन्होंने अपनी चुनावी रैलियों ने मोदी-अडानी के कथित संबंधों को लेकर मोदी पर हमला बोला। अडानी ने हालांकि सफाई देते हुए कहा है कि वह मार्केट रेट पर बीजेपी को अपने एयरक्राफ्ट रेंट पर देते हैं या जो भी उनसे मांगता है।

मोदी ही नहीं, दूसरे नेताओं से भी नजदीकी

अडानी ने हालांकि मोदी से अपनी नजदीकियों को कभी छिपाने की कोशिश नहीं की, तब भी नहीं जब वर्ष 2004 में एनडीए सरकार सत्ता से बाहर हो गई थी। लेकिन, सचाई यह है कि वह उन पर ज्यादा निर्भर नहीं रहे। यहां तक कि हरियाणा, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान में अपने पावर बिजनस को बढ़ाने और ओडिशा में बंदरगाहों के लिए बिडिंग के वास्ते अडानी ने यूपीए में भी अपने कई दोस्त बनाए हैं। ऐसा माना जाता है कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ ने अडानी की उनके शुरुआती दिनों में मदद की थी। कई बिजनसमैन एनसीपी नेता शरद पवार से भी उनकी नजदीकियों की बात बताते हैं।

विदेशों में भी भारी निवेश कर रहा है ग्रुप

दोस्त बनाने की उनकी काबिलियत सिर्फ देश की सीमाओं तक सीमित नहीं है। समझा जाता है कि उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के शीर्ष राजनीतिक हलकों में भी लोगों से अपने बेहतरीन रिश्ते बनाए हैं, जहां अडानी ग्रुप का कोयला खदान और ब्रिसबेन के पास एक पोर्ट में कुल 6 अरब डॉलर के निवेश की योजना है।

बता दें जब से पिछले साल 13 सितंबर को बीजेपी ने नरेंद्र मोदी को अपना पीएम उम्मीदवार घोषित किया है तब से लेकर अब तक अडानी ग्रुप की 3 लिस्टेड कंपनियों- अडानी इंटरप्राइजेज, अडानी पोर्ट, और अडानी पावर का टोटल मार्केट कैपिटलाइजेशन 85.35 पर्सेंट बढ़कर 95,925 करोड़ रुपये से भी ज्यादा का हो गया है। इसके मुकाबले सेंसेक्स में इस अवधि में महज 14.76 पर्सेंट की वृद्धि हुई है।

अब इसे किसी भी नज़रिये से देखा जाए. लेकिन इतना तो साफ़ है कि गौतम अडानी जिस मुकाम पर आज हैं. उसके लिए सरकार बाद में पहले उनके स्वयं की मेहनत और लगन है.

Share:

administrator